Sanskrit

उ॒भया॑सो जातवेदः स्याम ते स्तो॒तारो॑ अग्ने सू॒रय॑श्च॒ शर्म॑णि । वस्वो॑ रा॒यः पु॑रुश्च॒न्द्रस्य॒ भूय॑सः प्र॒जाव॑तः स्वप॒त्यस्य॑ शग्धि नः ॥ (१२)

Hindi

हे जातवेद! तुम्हारे स्तोता और यजमान दोनों ही सुख प्राप्ति के लिए तुम्हारी शरण में हैं. हमें निवास-योग्य अतिशय प्रसन्नतादायक एवं बहुत सी प्रजाओं तथा संतान से युक्त धन दो. (१२)

English

O Jathaveda! Both your stota and host are in your refuge for happiness. Give us wealth from the most delightful and many nations and children. (12)