3.3.7Rigved
श्लोक:३.३.७ (3.3.7)सूक्त (३)

Sanskrit

अग्ने॒ जर॑स्व स्वप॒त्य आयु॑न्यू॒र्जा पि॑न्वस्व॒ समिषो॑ दिदीहि नः । वयां॑सि जिन्व बृह॒तश्च॑ जागृव उ॒शिग्दे॒वाना॒मसि॑ सु॒क्रतु॑र्वि॒पाम् ॥ (७)

Hindi

हे अग्नि! हमें सुपुत्र एवं दीर्घ आयु प्राप्त कराने के लिए देवों की स्तुति करो एवं अन्न द्वारा उन्हें प्रसन्न करो. हे जागरणशील अग्नि! हमारी फसलों के लाभ के लिए वर्षा को प्रेरित करो, अन्नों का दान करो तथा महान्‌ यजमान को धन दो, क्योंकि तुम उत्तम कर्म करने वाले तथा देवों के प्यारे हो. (७)

English

O agni! Praise the gods for giving us sons and long life and please them with food. O burning agni! For the benefit of our crops, inspire the rain, donate food and give wealth to the great lord, for you are the doers of good deeds and the beloved of the gods. (7)

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श्लोक:३.३.७ (3.3.7)सूक्त (३)