Sanskrit
ऊ॒र्ध्वो वां॑ गा॒तुर॑ध्व॒रे अ॑कार्यू॒र्ध्वा शो॒चींषि॒ प्रस्थि॑ता॒ रजां॑सि । दि॒वो वा॒ नाभा॒ न्य॑सादि॒ होता॑ स्तृणी॒महि॑ दे॒वव्य॑चा॒ वि ब॒र्हिः ॥ (४)
Hindi
अग्नि और कुश के लिए यज्ञ में एक उत्तम मार्ग बनाया गया है. दीप्ति वाला हव्य ऊपर जाता है. होता दीप्तियुक्त यज्ञशाला के बीच में बैठा है. हम देवों से व्याप्त कुश बिछाते हैं. (४)
English
A perfect path has been created in the yajna for agni and kush. The glowing havya goes up. The lamplighted one is sitting in the middle of the yajnashala. We lay the kusha pervaded by the gods. (4)
Shlok 1 of 1