4.10.4Rigved
श्लोक:४.१०.४ (4.10.4)सूक्त (१०)
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आ॒भिष्टे॑ अ॒द्य गी॒र्भिर्गृ॒णन्तोऽग्ने॒ दाशे॑म । प्र ते॑ दि॒वो न स्त॑नयन्ति॒ शुष्माः॑ ॥ (४)
हे अग्नि! हम आज इन स्तुतियों द्वारा तुम्हारी प्रशंसा करते हुए तुम्हें हवि देंगे. तुम्हारी शुद्ध करने वाली ज्वालाएं सूर्य की किरणों के समान शब्द करती हैं. (४)
O agni! We will praise you with these praises today. Your purifying flames say the same words as the rays of the sun. (4)