4.12.4Rigved
श्लोक:४.१२.४ (4.12.4)सूक्त (१२)
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यच्चि॒द्धि ते॑ पुरुष॒त्रा य॑वि॒ष्ठाचि॑त्तिभिश्चकृ॒मा कच्चि॒दागः॑ । कृ॒धी ष्व१॒॑स्माँ अदि॑ते॒रना॑गा॒न्व्येनां॑सि शिश्रथो॒ विष्व॑गग्ने ॥ (४)
हे अतिशय युवा अग्नि! यद्यपि हम अज्ञान के कारण तुम्हारी सेवा करने वालों के प्रति कुछ पाप करते हैं, फिर भी तुम हमें धरती पर पापरहित बनाओ. चारों ओर फैले हुए हमारे पापों को ढीला करो. (४)
O very young agni! Although we commit some sins against those who serve you because of ignorance, you make us sinless on earth. Loosen our sins spread all around. (4)