4.7.7Rigved
श्लोक:४.७.७ (4.7.7)सूक्त (७)
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स॒सस्य॒ यद्वियु॑ता॒ सस्मि॒न्नूध॑न्नृ॒तस्य॒ धाम॑न्र॒णय॑न्त दे॒वाः । म॒हाँ अ॒ग्निर्नम॑सा रा॒तह॑व्यो॒ वेर॑ध्व॒राय॒ सद॒मिदृ॒तावा॑ ॥ (७)
देवगण प्रातःकाल नींद त्याग कर जल के कारणभूत यज्ञ में अग्नि को प्रसन्न करते हैं. महान्, नमस्कारपूर्वक हव्य दिए गए एवं सत्ययुक्त अग्नि सदा ही यजमानों के यज्ञों को जानें. (७)
Devgans give up sleep in the morning and please the agni in the yagya due to water. Great, salutations were given and the agni of truth always know the sacrifices of the hosts. (7)