4.9.4Rigved
श्लोक:४.९.४ (4.9.4)सूक्त (९)
Shlok 1 of 1
उ॒त ग्ना अ॒ग्निर॑ध्व॒र उ॒तो गृ॒हप॑ति॒र्दमे॑ । उ॒त ब्र॒ह्मा नि षी॑दति ॥ (४)
वे अग्नि यज्ञ में देवपत्नी, अध्वर्यु, गृहपति अथवा ब्रह्मा बनकर बैठते हैं. (४)
They sit in agni yajna as devapatti, adhwaryu, grihapati or brahma. (4)