Sanskrit

एन्द्र॑ या॒ह्युप॑ नः परा॒वतो॒ नायमच्छा॑ वि॒दथा॑नीव॒ सत्प॑ति॒रस्तं॒ राजे॑व॒ सत्प॑तिः । हवा॑महे त्वा व॒यं प्रय॑स्वन्तः सु॒ते सचा॑ । पु॒त्रासो॒ न पि॒तरं॒ वाज॑सातये॒ मंहि॑ष्ठं॒ वाज॑सातये ॥ (१)

Hindi

हे इंद्र! यज्ञशाला में ऋत्विजों के पालक यज्ञमान के समान, अस्ताचल को जाने वाले नक्षत्रेश चंद्र के समान एवं सम्मुख उपस्थित सोम के समान स्वर्ग से हमारे समीप आओ. जिस प्रकार पुत्र अन्न भक्षण के लिए पिता को बुलाते हैं, उसी प्रकार हम भी सोमरस निचुड़ जाने पर तुम्हें बुलाते हैं. हम ऋत्विजों के साथ महान्‌ इंद्र को हव्य स्वीकार करने के लिए बुलाते हैं. (१)

English

O Indra! Like the yajnaman, the guardian of the Ritvijas in the yajnashala, like the Nakshatrash Chandra going to astachal and like the som in front of us, come to us from heaven. Just as the sons call upon the Father to eat food, so we also call you when we go to Someras. We call the great Indra along with the Ritvijs to accept the havya. (1)