1.111.2Rigved
श्लोक:१.१११.२ (1.111.2)सूक्त (१११)

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श्लोक:१.१११.२ (1.111.2)सूक्त (१११)

आ नो॑ य॒ज्ञाय॑ तक्षत ऋभु॒मद्वयः॒ क्रत्वे॒ दक्षा॑य सुप्र॒जाव॑ती॒मिष॑म् । यथा॒ क्षया॑म॒ सर्व॑वीरया वि॒शा तन्नः॒ शर्धा॑य धासथा॒ स्वि॑न्द्रि॒यम् ॥ (२)

हे ऋभुओ! हमारे यज्ञ के लिए उज्ज्वल अन्न पैदा करो. हमारे यज्ञकर्म एवं बल के निमित्त शोभन पुत्र-पौत्रादि से युक्त धन दो, जिससे हम अपनी वीर संतान के साथ सुखपूर्वक निवास करें. हमें बल के लिए अन्न दो. (२)

Hey, Lord! Create bright grains for our yajna. For the sake of our yajnakarma and strength, give us money with shobhan son-grandson, so that we may live happily with our brave children. Give us food for strength. (2)