1.114.3Rigved
श्लोक:१.११४.३ (1.114.3)सूक्त (११४)

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श्लोक:१.११४.३ (1.114.3)सूक्त (११४)

अ॒श्याम॑ ते सुम॒तिं दे॑वय॒ज्यया॑ क्ष॒यद्वी॑रस्य॒ तव॑ रुद्र मीढ्वः । सु॒म्ना॒यन्निद्विशो॑ अ॒स्माक॒मा च॒रारि॑ष्टवीरा जुहवाम ते ह॒विः ॥ (३)

हे कामवर्षक रुद्र! हम वीरनाशक एवं मरुत्‌ सहयोगी तुम्हारी कृपा देवयज्ञ के द्वारा पावें. हमारी प्रजाओं के सुख की इच्छा करते हुए तुम उनके समीप आओ. प्रजा को हानिरहित देखकर हम तुम्हारे लिए हव्य देंगे. (३)

O workman Rudra! May we find your grace through godly and deserted allies. Come near to our people, wishing for their happiness. Seeing the people harmless, we will give you a good deed. (3)