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स नो॒ नेदि॑ष्ठं॒ ददृ॑शान॒ आ भ॒राग्ने॑ दे॒वेभिः॒ सच॑नाः सुचे॒तुना॑ म॒हो रा॒यः सु॑चे॒तुना॑ । महि॑ शविष्ठ नस्कृधि सं॒चक्षे॑ भु॒जे अ॒स्यै । महि॑ स्तो॒तृभ्यो॑ मघवन्सु॒वीर्यं॒ मथी॑रु॒ग्रो न शव॑सा ॥ (११)
हे अग्नि! तुम हमें अपने समीप दिखाई देते हुए भी देवों के साथ हव्य का भोग करते हो. तुम भक्तों के प्रति अनुग्रह भरे शोभन चित्त से पूजनीय धन लाते हो. हे बलसंपन्न अग्नि! पृथ्वी का दर्शन एवं भोग करने के लिए हमें अधिक अन्न दो. हे धनस्वामी अग्नि! स्तोताओं को ु्भत्ययुकत धन प्रदान करो. तुम परम बली एवं क्रूर व्यक्ति के समान हमारे शत्रुओं को नष्ट करो. (११)
O fire! You enjoy the havya with the gods even when you see us near you. You bring the revered wealth to the devotees with a graciously adorned mind. O strong fire! Give us more food to see and enjoy the earth. O rich godly fire! Give money to the stoetas. You destroy our enemies like the supreme sacrifice and cruel one. (11)