1.168.9Rigved
श्लोक:१.१६८.९ (1.168.9)सूक्त (१६८)

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श्लोक:१.१६८.९ (1.168.9)सूक्त (१६८)

असू॑त॒ पृश्नि॑र्मह॒ते रणा॑य त्वे॒षम॒यासां॑ म॒रुता॒मनी॑कम् । ते स॑प्स॒रासो॑ऽजनय॒न्ताभ्व॒मादित्स्व॒धामि॑षि॒रां पर्य॑पश्यन् ॥ (९)

पृश्नि ने शीघ्र गति वाले मरुतों के समूह को विशाल युद्ध के लिए जन्म दिया है. समान रूप वाले मरुतों ने जल को उत्पन्न किया. इसके पश्चात्‌ सब लोगों ने अभिलषित अन्न के दर्शन किए. (९)

The earth has given birth to a group of fast-paced maruts for a great war. Maruts of the same form produced water. After this, all the people saw the desired food. (9)