1.28.6Rigved
श्लोक:१.२८.६ (1.28.6)सूक्त (२८)

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श्लोक:१.२८.६ (1.28.6)सूक्त (२८)

उ॒त स्म॑ ते वनस्पते॒ वातो॒ वि वा॒त्यग्र॒मित् । अथो॒ इन्द्रा॑य॒ पात॑वे सु॒नु सोम॑मुलूखल ॥ (६)

हे ऊखल रूप काष्ट! तुम्हारे ही सामने होकर हवा चलती है, इसलिए हे ऊखल! इंद्र देवता के पान के लिए सोमरस तैयार करो. (६)

O o fuming form! The wind blows in front of you, so O Ukha! Prepare somras for the paan of Indra Devta. (6)