1.29.5Rigved
श्लोक:१.२९.५ (1.29.5)सूक्त (२९)
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समि॑न्द्र गर्द॒भं मृ॑ण नु॒वन्तं॑ पा॒पया॑मु॒या । आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ ॥ (५)
हे इंद्र! यह गधे के रूप वाला हमारा बैरी निंदा रूपी वचनों से आपकी बदनामी कर रहा है. इसे मार डालो. हे अनंत धनशाली इंद्र! हमें सुंदर और अगणित गायों तथा अश्वों द्वारा उत्तम धनवान् बनाओ. (५)
O Indra! This donkey-like adversery is blaming you with bad words. Kill it. O infinite wealthy Indra! Make us rich with beautiful and countless cows and horses. (5)