1.64.7Rigved
श्लोक:१.६४.७ (1.64.7)सूक्त (६४)
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म॒हि॒षासो॑ मा॒यिन॑श्चि॒त्रभा॑नवो गि॒रयो॒ न स्वत॑वसो रघु॒ष्यदः॑ । मृ॒गा इ॑व ह॒स्तिनः॑ खादथा॒ वना॒ यदारु॑णीषु॒ तवि॑षी॒रयु॑ग्ध्वम् ॥ (७)
हे महान् मेधावी, तेजस्वी, पर्वत के समान शक्तिसंपन्न एवं शीघ्र गतिशाली मरुद्गण! तुमने लाल रंग वाली बड़वा को शक्ति प्रदान की है, इसलिए तुम सूंड़ वाले हाथी के समान वृक्षसमूह को खाते हो. (७)
O great, brilliant, bright, mountain-like mighty and fast-moving deserters! You have given strength to the red-colored barwa, so you eat a group of trees like a trunked elephant. (7)