1.8.2Atharvaved
मंत्र:१.८.२ (1.8.2)सूक्त (८)
Shlok 1 of 1
अ॒यं स्तु॑वा॒न आग॑मदि॒मं स्म॒ प्रति॑ हर्यत । बृह॑स्पते॒ वशे॑ ल॒ब्ध्वाग्नी॑षोमा॒ वि वि॑ध्यतम् ॥ (२)
हे बृहस्पति आदि देवो! आप की स्तुति करता हुआ जो यह मनुष्य आप की शरण में आया है, यह हमारा विरोधी शत्रु है. हे बृहस्पति, अग्नि एवं सोम! इन उपद्रवकारियों को वश में कर के अनेक प्रकार से दंडित करो. (२)
O God of Jupiter! This man who has come to your shelter praising you is our opposing enemy. O Jupiter, Agni and Soma! Control these miscreants and punish them in many ways. (2)