10.1.6Atharvaved
मंत्र:१०.१.६ (10.1.6)सूक्त (१)
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प्र॑ती॒चीन॑ आङ्गिर॒सोऽध्य॑क्षो नः पु॒रोहि॑तः । प्र॒तीचीः॑ कृ॒त्या आ॒कृत्या॒मून्कृ॑त्या॒कृतो॑ जहि ॥ (६)
हमारा पुरोहित पश्चिम देश का रहने वाला एवं हमारे सामने उपस्थित है. पूर्व के निवासियों ने कृत्या का निर्माण किया है. हे पुरोहित! तुम उस को नष्ट करो. (६)
Our priest hails from the West and is present before us. Residents of the east have built krita. O priest! You destroy that. (6)