10.8.1Atharvaved
मंत्र:१०.८.१ (10.8.1)सूक्त (८)

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मंत्र:१०.८.१ (10.8.1)सूक्त (८)

यो भू॒तं च॒ भव्यं॑ च॒ सर्वं॒ यश्चा॑धि॒तिष्ठ॑ति । स्वर्यस्य॑ च॒ केव॑लं॒ तस्मै॑ ज्ये॒ष्ठाय॒ ब्रह्म॑णे॒ नमः॑ ॥ (१)

जो इन भूत, भविष्य तथा वर्तमान कालों को व्याप्त कर के स्थित है तथा जिस का स्वरूप केवल प्रकाशमय है, उसी ज्येष्ठ ब्रह्म को मैं नमस्कार करता हूं. (१)

I salute the Jyeshtha Brahm, who is situated by spreading these past, future and present times and whose form is only light. (1)