10.8.2Atharvaved
मंत्र:१०.८.२ (10.8.2)सूक्त (८)

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मंत्र:१०.८.२ (10.8.2)सूक्त (८)

स्क॒म्भेने॒मे विष्ट॑भिते॒ द्यौश्च॒ भूमि॑श्च तिष्ठतः । स्क॒म्भ इ॒दं सर्व॑मात्म॒न्वद्यत्प्रा॒णन्नि॑मि॒षच्च॒ यत् ॥ (२)

परमात्मा के द्वारा धारण की हुई भूमि और स्वर्ग अपने स्थान पर स्थित हैं. जो सांस लेते हैं और जो पलक झपकाते हैं, वे सब आत्मा के समान परमात्मा में व्याप्त हैं. (२)

The land and heaven possessed by God are located in their place. Those who breathe and those who blink are all pervaded in god like the soul. (2)