10.8.3Atharvaved
मंत्र:१०.८.३ (10.8.3)सूक्त (८)

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मंत्र:१०.८.३ (10.8.3)सूक्त (८)

ति॒स्रो ह॑ प्र॒जा अ॑त्या॒यमा॑य॒न्न्यन्या अ॒र्कम॒भितो॑ऽविशन्त । बृ॒हन्ह॑ तस्थौ॒ रज॑सो वि॒मानो॒ हरि॑तो॒ हरि॑णी॒रा वि॑वेश ॥ (३)

तीन प्रकार की प्रजाएं अतिक्रमण करती हुई परमेश्वर को प्राप्त होती हैं. एक प्रकार की अर्थात्‌ सतोगुणी प्रजाएं सूर्य में प्रविष्ट होती हैं. दूसरे प्रकार की अर्थात्‌ रजोगुणी प्रजाएं रजोलोक को नापती हुई स्थित रहती हैं. तीसरी अर्थात्‌ तमोगुणी प्रजाएं सब का हरण करती हुई हरे रंग में अर्थात्‌ अंधकार में प्रवेश करती हैं. (३)

Three kinds of subjects transcend and receive God. One type of i.e. satoguni subjects enter the sun. The second type of i.e. rajoguni subjects are located measuring Rajolok. Thirdly, tamoguni subjects take away everyone and enter green color i.e. darkness. (3)