11.2.3Atharvaved
मंत्र:११.२.३ (11.2.3)सूक्त (२)
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क्रन्दा॑य ते प्रा॒णाय॒ याश्च॑ ते भव॒ रोप॑यः । नम॑स्ते रुद्र कृण्मः सहस्रा॒क्षाया॑मर्त्य ॥ (३)
हे भव! हम तुम्हारे शब्द और प्राण वायु को नमस्कार करते हैं. हम तुम्हारे मोहक शरीरों को नमस्कार करते हैं. हे रुद्र! हे सहस्राक्ष एवं मृत्यु रहित! हम तुम्हें नमस्कार करते हैं. (३)
O bhava! We salute your words and life to the air. We salute your seductive bodies. O Rudra! O Sahasraksha and without death! We greet you. (3)