11.6.2Atharvaved
मंत्र:११.६.२ (11.6.2)सूक्त (६)
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नम॑स्ते प्राण॒ क्रन्दा॑य॒ नम॑स्ते स्तनयि॒त्नवे॑ । नम॑स्ते प्राण वि॒द्युते॒ नम॑स्ते प्राण॒ वर्ष॑ते ॥ (२)
हे ध्वनि करते हुए प्राण! तुम्हारे लिए नमस्कार है, मेघ घटा में घुस कर वर्षा करने वाले तुम्हारे लिए नमस्कार है. बिजली के रूप में प्रकाशित एवं वर्षा करते हुए तुम्हें नमस्कार है. (२)
O soul making sound! Salutations to you, salutations to you who enter the cloud and rain. Salutations to you while lighting and raining in the form of electricity. (2)