11.7.5Atharvaved
मंत्र:११.७.५ (11.7.5)सूक्त (७)
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पूर्वो॑ जा॒तो ब्रह्म॑णो ब्रह्मचा॒री घ॒र्मं वसा॑न॒स्तप॒सोद॑तिष्ठत् । तस्मा॑ज्जा॒तं ब्राह्म॑णं॒ ब्रह्म॑ ज्ये॒ष्ठं दे॒वाश्च॒ सर्वे॑ अ॒मृते॑न सा॒कम् ॥ (५)
सर्व जगत् के कारण ब्रह्म से सब से पहले ब्रह्मचारी उत्पन्न हुआ. उत्पन्न हुआ ब्रह्मचारी धर्म से अपनेआप को ढकता हुआ तप के द्वारा उठा. उस ब्रह्मचारी रूपी ब्रह्म से ब्राह्मणों का धन वेद उत्पन्न हुआ. उस वेद से अमृत के साथ अग्नि आदि देव उत्पन्न हुए. (५)
Because of the whole world, Brahman was born the first Brahmachari. Born brahmachari, covering himself with dharma, he rose through penance. The Wealth of Brahmins was born from that Brahmachari-like Brahman. From that Veda, agni adi dev was born with nectar. (5)