11.7.9Atharvaved
मंत्र:११.७.९ (11.7.9)सूक्त (७)
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इ॒मां भूमिं॑ पृथि॒वीं ब्र॑ह्मचा॒री भि॒क्षामा ज॑भार प्रथ॒मो दिवं॑ च । ते कृ॒त्वा स॒मिधा॒वुपा॑स्ते॒ तयो॒रार्पि॑ता॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ॥ (९)
सब से पहले उत्पन्न ब्रह्मचारी ने इस विस्तृत भूमि को पहली भिक्षा के रूप में ग्रहण किया. इस के बाद स्वर्ग को दूसरी भिक्षा के रूप में ग्रहण किया. वह भिक्षा में प्राप्त उन स्वर्ग और धरती को समिधा बना कर अग्नि की परिचर्या अर्थात् सेवा करता है. स्वर्ग और पृथ्वी के मध्य सभी प्राणी स्थापित किए गए हैं. (९)
Brahmachari, the first born, took this vast land as the first alms. After this, heaven was taken as the second alms. He takes care of agni by making those heaven and earth obtained in alms as a companion. All beings are established between heaven and earth. (9)