11.8.2Atharvaved
मंत्र:११.८.२ (11.8.2)सूक्त (८)
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ब्रू॒मो राजा॑नं॒ वरु॑णं मि॒त्रं विष्णु॒मथो॒ भग॑म् । अंशं॒ विव॑स्वन्तं ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः ॥ (२)
हम तेजस्वी वरुण की, मित्र की, विष्णु की, भग की, अंश और विवस्वान अर्थात् सूर्य की स्तुति करते हैं. वे हमें पाप से मुक्त करें. (२)
We praise the bright Varuna, the friend, Vishnu, the Bhaga, ansh and vivasvan i.e. the sun. Let them free us from sin. (2)