11.8.4Atharvaved
मंत्र:११.८.४ (11.8.4)सूक्त (८)

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मंत्र:११.८.४ (11.8.4)सूक्त (८)

ग॑न्धर्वाप्स॒रसो॑ ब्रूमो अ॒श्विना॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॑म् । अ॑र्य॒मा नाम॒ यो दे॒वस्ते॑ नो मुञ्च॒न्त्वंह॑सः ॥ (४)

हम प्रथम गिने जाने वाले गंधर्वो की, अप्सराओं की, अश्विनीकुमारों की, त्वष्टा की स्तुति करते हैं. वे हमें पाप से मुक्त करें. (४)

We praise the Gandharvas, the Apsaras, ashwinikumaras, tvashta, who are counted first. Let them free us from sin. (4)