11.8.5Atharvaved
मंत्र:११.८.५ (11.8.5)सूक्त (८)
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अ॑होरा॒त्रे इ॒दं ब्रू॑मः सूर्याचन्द्र॒मसा॑वु॒भा । विश्वा॑नादि॒त्यान्ब्रू॑म॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः ॥ (५)
हम दिनरात तथा सूर्य चंद्रमा दोनों की स्तुति करते हैं. हम सभी आदित्यों की स्तुति करते हैं. वे हमें पाप से मुक्त करें. (५)
We praise both day and night and the sun moon. We praise all Adityas. Let them free us from sin. (5)