11.8.7Atharvaved
मंत्र:११.८.७ (11.8.7)सूक्त (८)

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मंत्र:११.८.७ (11.8.7)सूक्त (८)

मु॒ञ्चन्तु॑ मा शप॒थ्यादहोरा॒त्रे अथो॑ उ॒षाः । सोमो॑ मा दे॒वो मु॑ञ्चतु॒ यमा॒हुश्च॒न्द्रमा॒ इति॑ ॥ (७)

दिन, रात और उषाएं शपथ से उत्पन्न पाप से हमारी रक्षा करें. वे सोम देव मुझे पाप से मुक्त करें, जिन्हें लोग चंद्रमा कहते हैं. (७)

May the day, night and the morning protect us from the sin caused by the oath. May those Som Devs free me from sin, whom people call the moon. (7)