12.1.9Atharvaved
मंत्र:१२.१.९ (12.1.9)सूक्त (१)
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यस्या॒मापः॑ परिच॒राः स॑मा॒नीर॑होरा॒त्रे अप्र॑मादं॒ क्षर॑न्ति । सा नो॒ भूमि॒र्भूरि॑धारा॒ पयो॑ दुहा॒मथो॑ उक्षतु॒ वर्च॑सा ॥ (९)
जिस पृथ्वी पर बहता हुआ जल रात में और दिन में समान रूप से गमन करता है, ऐसी अधिक जल वाली पृथ्वी हमें दूध के समान सार रूप फलों तथा तेज से युक्त करे. (९)
The earth on which the flowing water travels equally in the night and during the day, such an earth with more water should give us fruits and brightness like milk. (9)