12.2.10Atharvaved
मंत्र:१२.२.१० (12.2.10)सूक्त (२)
Shlok 1 of 1
क्र॒व्याद॑म॒ग्निं श॑शमा॒नमु॒क्थ्यं प्र हि॑णोमि प॒थिभिः॑ पितृ॒याणैः॑ । मा दे॑व॒यानैः॒ पुन॒रा गा॒ अत्रै॒वैधि॑ पि॒तृषु॑ जागृहि॒ त्वम् ॥ (१०)
उवथ प्रशंसक क्रव्याद अग्नि को मैं पितृयान मार्ग में भेजता हूं. हे क्रव्याद! तू पितरों में ही बढ़ और वहीं जागता रह. देवयान मार्ग द्वारा तू यहां दुबारा मत आ. (१०)
I send yuvath fan Kravyad Agni to Pitrayan Marg. O Kravyad! You grow in your fathers and stay awake there. Do not come here again by the way of God. (10)