12.2.9Atharvaved
मंत्र:१२.२.९ (12.2.9)सूक्त (२)
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क्र॒व्याद॑म॒ग्निमि॑षि॒तो ह॑रामि॒ जना॑न्दृं॒हन्तं॒ वज्रे॑ण मृ॒त्युम् । नि तं शा॑स्मि॒ गार्ह॑पत्येन वि॒द्वान्पि॑तॄ॒णां लो॒केऽपि॑ भा॒गो अ॑स्तु ॥ (९)
मैं अपने मंत्र रूप वज्र से क्रव्याद अग्नि को दूर करता हूं. गार्हपत्य अग्नि के द्वारा मैं उस अग्नि का शासन करता हूं. यह पितरों का भाग होता हुआ, उन के लोक में स्थित हो. (९)
I remove the agni with my mantra form Vajra. I rule that agni through the agni. It is part of the ancestors, located in their world. (9)