12.4.7Atharvaved
मंत्र:१२.४.७ (12.4.7)सूक्त (४)

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मंत्र:१२.४.७ (12.4.7)सूक्त (४)

यद॑स्याः॒ कस्मै॑ चि॒द्भोगा॑य॒ बाला॒न्कश्चि॑त्प्रकृ॒न्तति॑ । ततः॑ किशो॒रा म्रि॑यन्ते व॒त्सांश्च॒ घातु॑को॒ वृकः॑ ॥ (७)

किसी भोग के निमित्त इस वशा गाय के बालों को काटने से काटने वाले का युवा पुत्र मृत्यु को प्राप्त होता है तथा उस के पुत्रों का संहार शृगाल अर्थात्‌ सियार करते हैं. (७)

By cutting the hair of this vasa cow for the sake of any enjoyment, the young son of the cutter attains death and kills his sons by adorning the horn i.e. jackal. (7)