12.5.2Atharvaved
मंत्र:१२.५.२ (12.5.2)सूक्त (५)

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मंत्र:१२.५.२ (12.5.2)सूक्त (५)

स॒त्येनावृ॑ता श्रि॒या प्रावृ॑ता॒ यश॑सा॒ परी॑वृता ॥ (२)

यह धेनु सत्य, संपत्ति और यश से परिपूर्ण है. (२)

This dhenu is full of truth, wealth and fame. (2)