12.7.5Atharvaved
मंत्र:१२.७.५ (12.7.5)सूक्त (७)

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मंत्र:१२.७.५ (12.7.5)सूक्त (७)

मे॒निः श॒तव॑धा॒ हि सा ब्र॑ह्म॒ज्यस्य॒ क्षिति॒र्हि सा ॥ (५)

जो मनुष्य ब्राह्मण की आयु क्षीण करता है. उस को क्षीण करने वाली यह गौ सैकड़ों प्रकार के संहारक अस्त्रों के समान बन जाती है. (५)

The person who reduces the life of a Brahmin. This cow that weakens it becomes like hundreds of types of destructive weapons. (5)