12.8.2Atharvaved
मंत्र:१२.८.२ (12.8.2)सूक्त (८)
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दे॑वहे॒तिर्ह्रि॒यमा॑णा॒ व्यृद्धिर्हृ॒ता ॥ (२)
ब्राह्मणों की यह गाय हरण करते समय अर्थात् चुराते समय अस्त्र रूप है और चुराने के बाद चुराने वाले को क्षीण करने वाली होती है. (२)
This cow of Brahmins is a weapon while stealing and after stealing, it is going to weaken the stealer. (2)