13.3.7Atharvaved
मंत्र:१३.३.७ (13.3.7)सूक्त (३)

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मंत्र:१३.३.७ (13.3.7)सूक्त (३)

यो अ॑न्ना॒दो अन्न॑पतिर्ब॒भूव॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॑रु॒त यः । भू॒तो भ॑वि॒ष्यद्भुव॑नस्य॒ यस्पतिः॑ । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (७)

जो ब्रह्मणस्पति हैं, जो अन्न के पालक और भक्षक हैं, जो भूत, भविष्य और लोक के स्वामी हैं, उन क्रोधयुक्त देव के अपराधी तथा विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! कंपित करते हुए क्षीण बनाओ तथा अपने पाशों में बांध लो. (७)

Those who are Brahmanaspati, who are the guardians and eaters of food, who are the masters of the past, the future and the world, the criminal of those angry gods and the violent of the learned Brahmin, O Rohit Dev! Make the weak by staggering and tie it in your loops. (7)