14.1.6Atharvaved
मंत्र:१४.१.६ (14.1.6)सूक्त (१)

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मंत्र:१४.१.६ (14.1.6)सूक्त (१)

चित्ति॑राउप॒बर्ह॑णं॒ चक्षु॑रा अ॒भ्यञ्ज॑नम् । द्यौर्भूमिः॒ कोश॒ आसी॒द्यदया॑त्सू॒र्यापति॑म् ॥ (६)

जब सूर्या अपने पति के पास गई, तब ज्ञान उस का तकिया तथा चक्षु ही अंजन बने. आकाश और पृथ्वी उस के कोष थे. (६)

When Surya went to her husband, knowledge became Anjan, her pillow and eyes became Anjan. The sky and the earth were his treasures. (6)