14.1.7Atharvaved
मंत्र:१४.१.७ (14.1.7)सूक्त (१)

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मंत्र:१४.१.७ (14.1.7)सूक्त (१)

रैभ्या॑सीदनु॒देयी॑ नाराशं॒सी न्योच॑नी।सू॒र्याया॑ भ॒द्रमिद्वासो॒ गाथ॑यति॒परि॑ष्कृता ॥ (७)

वेदमंत्रों के साथ उस की पिता के घर से विदाई हुई. मंत्रों से ही पति गृह में उस का स्वागत हुआ. मंत्रों के द्वारा पवित्र बना पति के घर का वस्त्र उस वधू का कल्याण करता है. (७)

He was farewell from his father's house with Vedamantras. She was welcomed in the husband's house only with mantras. The cloth of the husband's house made pure by mantras welfares the bride. (7)