14.2.1Atharvaved
मंत्र:१४.२.१ (14.2.1)सूक्त (२)
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तुभ्य॒मग्रे॒पर्य॑वहन्त्सू॒र्यां व॑ह॒तुना॑ स॒ह । स नः॒ पति॑भ्यो जा॒यां दा अ॑ग्ने प्र॒जया॑स॒ह ॥ (१)
हे अग्नि देव! हम उपहारों के साथ सूर्या को तुम्हारे निमित्त लाए थे. तुम हमें संतान वाली पत्नी दो. (१)
O God of Agni! We brought Surya for you with gifts. You give us a wife with children. (1)