14.2.5Atharvaved
मंत्र:१४.२.५ (14.2.5)सूक्त (२)

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मंत्र:१४.२.५ (14.2.5)सूक्त (२)

आवा॑मगन्त्सुम॒तिर्वा॑जिनीवसू॒ न्यश्विना हृ॒त्सु कामा॑ अरंसत । अभू॑तं गो॒पामि॑थु॒ना शु॑भस्पती प्रि॒या अ॑र्य॒म्णो दुर्याँ॑ अशीमहि ॥ (५)

हे उषाकालीन ऐश्वर्य वाले अश्विनकुमारो! तुम्हारे हृदय में जो अभीष्ट है, वह तुम्हारी कृपामयी बुद्धि के द्वारा हमें प्राप्त हो. तुम हमारे प्रिय तथा रक्षक बनो. हम सूर्य देव की कृपा से घरों में सुख का भोग करने वाले हैं. (५)

O Ashwinkumaro, the o omensy of usha! May what is desired in your heart be achieved by your gracious intellect. Be our beloved and protector. We are going to enjoy happiness in homes by the grace of Sun God. (5)