Sanskrit

बृ॑ह॒तश्च॒ वै सर॑थन्त॒रस्य॑ चादि॒त्यानां॑ च॒ विश्वे॑षां च दे॒वानां॑ प्रि॒यं धाम॑ भवति॒ तस्य॒ प्राच्यां॑ दि॒शि ॥ (४)

Hindi

जो ऐसे विद्वान्‌ व्रतचारी को अपशब्द कहता है, वह बृहत्‌, रथंतर, आदित्य और विश्वे देवों का अपराधी होता है. (४)

English

The one who abuses such a learned vratchari is the culprit of Brihat, Rathantar, Aditya and Vishwa Devs. (4)