15.3.1Atharvaved
मंत्र:१५.३.१ (15.3.1)सूक्त (३)

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मंत्र:१५.३.१ (15.3.1)सूक्त (३)

ससं॑वत्स॒रमू॒र्ध्वोऽति॑ष्ठ॒त्तं दे॒वा अ॑ब्रुव॒न्व्रात्य॒ किं नु ति॑ष्ठ॒सीति॑ ॥ (१)

वह एक वर्ष तक खड़ा रहा, तब देवताओं ने उस से पूछा-“हे व्रात्य! यह तप क्यों कर रहे हो?” (१)

He stood for a year, and the gods asked him, "O Vratya! Why are you doing this penance?" (1)