15.4.5Atharvaved
मंत्र:१५.४.५ (15.4.5)सूक्त (४)
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ग्रैष्मौ॒ मासौ॑गो॒प्तारा॒वकु॑र्वन्यज्ञाय॒ज्ञियं॑ च वामदे॒व्यं चा॑नुष्ठा॒तारौ॑ ॥ (५)
दक्षिण दिशा की ओर देवताओं ने ग्रीष्म ऋतु के दो महीनों को उस का रक्षक बनाया तथा यज्ञायज्ञिय और वामदेव्य को उस का अनुष्ठान करने वाला नियुक्त किया. (५)
Towards the south, the gods made the two months of summer its protector and appointed Yajnayagyya and Vamdevya as its ritualists. (5)