15.4.6Atharvaved
मंत्र:१५.४.६ (15.4.6)सूक्त (४)
Shlok 1 of 1
ग्रैष्मा॑वेनं॒मासौ॒ दक्षि॑णाया दि॒शो गो॑पायतो यज्ञाय॒ज्ञियं॑ च वामदे॒व्यं चानु॑ तिष्ठतो॒ यए॒वं वेद॑ ॥ (६)
जो इस बात को जानता है, दक्षिण दिशा की ओर से ग्रीष्म ऋतु के दो महीने उस की रक्षा करते हैं तथा यज्ञायज्ञिय और वामदेव उस के अनुकूल होते हैं. (६)
Whoever knows this, two months of summer from the south direction protect him and Yajnayagya and Vamdev are favorable to him. (6)