15.5.3Atharvaved
मंत्र:१५.५.३ (15.5.3)सूक्त (५)
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नास्य॑ प॒शून्न स॑मा॒नान्हि॑नस्ति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (३)
जो इसे जानता है, उस के अनुकूल रहने वाले पुरुषों और पशुओं की वे हिंसा नहीं करते. (३)
They do not oppress men and animals who live in harmony with him who knows it. (3)