16.1.7Atharvaved
मंत्र:१६.१.७ (16.1.7)सूक्त (१)

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मंत्र:१६.१.७ (16.1.7)सूक्त (१)

यो॒प्स्वग्निरति॒ तं सृ॑जामि म्रो॒कं ख॒निं त॑नू॒दूषि॑म् ॥ (७)

शरीर के बल का अपहरण कर के जलों के भीतर ले जाने वाले अग्नि का भी मैं त्याग करता हूं. (७)

I also sacrifice the agni that hijacks the force of the body and takes it inside the waters. (7)