16.4.6Atharvaved
मंत्र:१६.४.६ (16.4.6)सूक्त (४)

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मंत्र:१६.४.६ (16.4.6)सूक्त (४)

स्व॒स्त्यद्योषसो॑ दो॒षस॑श्च॒ सर्व॑ आपः॒ सर्व॑गणो अशीय ॥ (६)

उषा काल और रात्रि के द्वारा मंगल हो. मैं सभी गणों और जलों का उपयोग करने वाला बनूं. (६)

Mars is done through usha kaal and night. Let me be the one who uses all the ganas and waters. (6)