16.5.1Atharvaved
मंत्र:१६.५.१ (16.5.1)सूक्त (५)

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मंत्र:१६.५.१ (16.5.1)सूक्त (५)

वि॒द्म ते॑स्वप्न ज॒नित्रं॒ ग्राह्याः॑ पु॒त्रोऽसि॑ य॒मस्य॒ कर॑णः ॥ (१)

हे स्वप्न! तू ग्राहय पिशाचों से उत्पन्न हुआ है तथा यम को प्राप्त करने वाला है. मैं तेरी उत्पत्ति जानता हूं. (१)

O dream! You are born of acceptable vampires and are about to receive Yama. I know your origin. (1)