16.5.3Atharvaved
मंत्र:१६.५.३ (16.5.3)सूक्त (५)

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मंत्र:१६.५.३ (16.5.3)सूक्त (५)

तं त्वा॑ स्वप्न॒तथा॒ सं वि॑द्म॒ स नः॑ स्वप्न दुः॒ष्वप्न्या॑त्पाहि ॥ (३)

हे प्रश्न! हम तुम्हें भलीभांति जानते हैं. तुम हमें बुरे स्वप्नों से बचाओ. (३)

This is the question! We know you very well. You save us from nightmares. (3)