16.6.2Atharvaved
मंत्र:१६.६.२ (16.6.2)सूक्त (६)
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उ॒षोयस्मा॑द्दुः॒ष्वप्न्या॒दभै॒ष्माप॒ तदु॑च्छतु ॥ (२)
हे उषा देवी! जिस बुरे स्वप्र से हम डरते हैं, वह बुरा स्वप्र समाप्त हो जाए. (२)
O Usha Devi! The bad self that we are afraid of, that bad self-love will end. (2)